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टैग्स: गीत-संगीत


ब्लॉग्स (16)
प्रिये जानमसमय किस तरह रेत कीतरह निकल गया....तेरी-मेरी चाहतों काका सूरज भोर सेशाम की ओर निकल गया....फिर वही काली अंधियारी रातफिर बैचेनी और तन्हा राततुम्हारे आने की कल्पनाओं कीसेज आज फिरसजने लगी है...तुम आओ या न आओ...तुम्हें हमारी चाहतबुलाने लगी है...सिर्फ ... आगे पढ़ें...

जिस तरह बादल बरसने से पहले रिझाते हैं..ठीक उसी तरह तुम्हारी यादें भीहमें रिझाती है...याद आते हैं वो पल, जब तुम इसी बारिश मेंभिगकर मेरे आशियानें में आई थींमेरा दिल तो तुम्हाराखरोंदा था,फिर क्यों... दूर हो गईआज फिर इस बरते पानी नेवर्षों बाद फिरवही याद दिला ... आगे पढ़ें...

यूँ तो बहुत से लोगों ने चम्चागिरी के ऊपर कई ग्रंथ लिख दिए हैं। वाकई में चम्चागिरी विषय बहुत अच्छा है, जिसे अगर आत्मसात कर लिया जाए तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि आप बहुत ही लाभान्वित होगे। अथाह फल-फूल जाओगे। सुखी और सम्मपन्न हो जाओगे। बंगला, गाड़ी सब पा ... आगे पढ़ें...